अब होली नहीं मनाना है

मुझे पता है हर साल की तरह
इस साल भी तुम होली मनाओगे
भांग, गांजा, चरस,
अफ़ीम दूध में घोलोगे
कायर अवीर का टीका
माथे पर लगाओगे
और शराब के नशे में
धूत होकर सबको
“हैप्पी होली, हैप्पी होली” बोलोगे।
मेरे भाई तुम क्यों
इतने खुश होकर
होली मना रहे हो?
अग्नीकुंड में चौराहे पर
बहन होलिका को
खुद ही जिंदा जला रहे हो?
मेरे भाई अब तो
इतिहास के पन्नों को पलटकर देखो
व्यर्थ ही किसी पर
किचड़, रंग, मिट्टी
गुलाल ना फेको ।
बस करो बहुजनों
अब तुम पढ़ लिखकर
बड़े हो गए हो
अपनी प्रतिभा के बलपर
अपने पैरो पर खड़े हो गए हो ।
हजारों सालों से हमें
विदेशी आर्यों ने
त्यौहारों में उलझाया है
सच्चाई दबाकर हमसे
हमें भड़काया, बहकाया है।
ना मानूंगा, ना मनाऊंगा कभी होली
तुम आज से ही ठान लो
कपटी, पाखंडी आर्यों को
अब तो पहचान लो जान लो
अब तुम सुन लो
इतिहास होली का
मैं आज तुम्हें बताऊंगा
अंबेडकर की औलाद हूं
मैं तुम पर नैतिक हक जताऊंगा ।
हजारों साल पहले जब
इस भारत की भूमि पर
विदेशी आर्यों ने कब्जा किया
तब राजा हिरण्याक्ष ने
आर्यों को हराया और फिर से
भारत की भूमि को
उन आर्यों से आजाद किया ।
तब उन पाखंडीओंने
छलपूर्वक ऐसा वार किया
राजा हिरण्याक्ष को
धोखे से मार दिया ।
राजा हिरण्यकश्यप ने
अपने भाई हिरण्याक्ष के हत्यारे
विष्णु की पूजा पाठ पर
लगा दिया राज्य में प्रतिबंध
कर्मकाण्ड होम-हवन कर दिया बंद
अपनी फितरत से लाचार
आर्यों की टोली आग बबूला हो गई
और फिर उन्होंने
एक गुप्त योजना बनाई ।
विष्णु ने प्रहलाद को भड़काया
अपने पिता से गद्दारी करके
प्रह्लाद ने पाखंड का साथ दिया
शराब, दुर्व्यसन, कर्मकाण्ड
और भक्ति में खो गया
तब राजा हिरण्यकश्यप ने प्रल्हाद को
राजमहल से बाहर कर दिया
इसी बात का फायदा आर्यों ने उठाया
देखो पाखंडियों की नस्ल
उन्होंने फिर से रची साजिश और
किया राजा हिरण्यकश्यप का कत्ल
कितने धोखेबाज है ये
कैसी इनकी अक्ल
इंसान की आड़ में लोमड़ी की शक्ल
फिर राजा हिरण्याक्ष
और हिरण्यकश्यप की
बहन “होलिका” पर
इन नराधमों की बुरी नजर पड़ी
एक अकेली “होलिका”
खूब जी जान से लड़ी
आखरी सांस तक उन पंडो से
उन जातिवादी गुंडों से
मगर कौन सुनता “होलिका” की
हृदय विदारक करुण पुकार
हवसखोरोंने किया
“होलिका” का सामूहिक बलात्कार
और फिर जिंदा “होलिका” को
अग्निकुंड में डाल दिया
ढोल बजाकर धूमधाम से
खूब मनाई खुशियां और
उसको “होली” का नाम दिया।
भारत की वो मूलनिवासी
अपनी बहन थी होलिका
वीर साहसी और प्रेम की
प्रतिमूर्ति थी वो “होलिका”
मूलनिवासी भाई मेरे
तुम्हे मेरा एक ही प्रश्न
अपनी बहन को जिंदा जलाने का
भला कोई मनाता है क्या जश्न ?
इसलिए भाई तुम्हे
जगना और जगाना है
बस करो अब मेरे भाई
अब होली नहीं मनाना है
अब होली नहीं मनाना है

🙏🌹जय भीम नमो बुद्धाय🌹🙏

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