आने वाली पीढ़ियां क्या अंधविश्वास,पाखंडवाद से निकल पाएंगी?


मेरे दिमाग में बार-बार यही प्रश्न उठता है कि क्या आने वाली पीढ़ी अंधविश्वास और पाखंड से निकल कर वैज्ञानिक चेतना जगा पायेगा? क्या वैज्ञानिक दृष्टिकोण समाज का निर्माण हो पायेगा? ये सवाल का जवाब खोजने का बहुत कोशिश करता हूँ। इस अंधविश्वास की दलदल से लोगों को कौन निकालेंगे? बहुत से महामानव ने जन्म लिए और अंधविश्वास, पाखंड और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आजीवन संघर्ष किये और लोगों को यह समझाते हुए चल बसे की मत पड़ पाखंड में बंधु, लेकिन लोग आज वैज्ञानिक युग में भी यह नहीं समझ पाया कि अंधविश्वास एक अफीम है। यह मन, शरीर के साथ अपने बच्चे और आने वाली पीढ़ी को भी बर्बाद कर देता है।

अंधविश्वास बहुत पुरानी मानसिक बीमारी है, इसीलिए कई बार मुझे लगता है ठीक नहीं हो पायेगा, लेकिन फिर भी मन नहीं मानता और मुझे ऐसा लगता है, देर ही सही, लेकिन लोग समझेंगे और बदलाव जरूर होगा। कब तक सत्य से दूर रह सकेंगे। कब तक झूठ का पर्दाफाश नहीं होगा। वास्तविकता सामने आने पर एक दिन लोगों को झूठ को त्यागकर सत्य में ही वापस आना पड़ेगा। आज भागदौड़ की जिंदगी में युवाओं के पास समय का बहुत अभाव है। एक तरफ घर-परिवार और दूसरी तफर जीवन-यापन के लिए नौकरी-पेशा। लोग दिनभर की हरारत से परेशान होने की वजह से कुछ सोचने की स्थिति में नहीं रहते। किसी को सुनने के लिए फुर्सत नहीं होती, लेकिन आस्था और धर्म के नाम पर कथा सुनने के लिए समय जरूर मिल जाते हैं, नहीं मिला तो नौकरी से छूट्टी लेकर पाखंडी कथावाचक को सुनने पहुँच जाते हैं, क्योंकि लोग काल्पनिक चीजों से डर जाते हैं।

स्वर्ग-नर्क, ये नहीं करोगे तो पाप पड़ेगा या ऐसे करने से सब पाप धूल जाएगा। दूसरा उस पाखंडी की बातों में आकर लालच में पड़ जाते हैं, उसके चरणस्पर्श से ही सब मनोकामना पूर्णा हो जाएगी, ऐसा लगता है जिसकी औलाद नहीं है वे बच्चे पाने के लालच में जाते है और जब औलाद है तो उसकी पढ़ाई को लेकर और पढ़ाई हो गयी तो अच्छी नौकरी के लिए, अच्छे घर में शादी हो ऐसे बहुत सी कामनाएं होती हैं। इसी का फायदा उठाकर पाखंडी बाबा आप लोगों की आँख में धूल झोकर बेवकूफ बना कर निकल लेता है। लाखों, करोड़ों की कमाई कर लेता है और आपको क्या मिलता है? कुछ भी नहीं। सब मेहनत की कमाई को हराम के खाने वाला ले जाता है, बच्चों की दवाई, पढ़ाई के लिए कुछ नहीं बचता और जिंदगी भर किस्मत को कोसते रहते हैं। तमाम अंधविश्वास फैलाने वाली फिल्म, लेख, साहित्य, उद्दीपक पर प्रतिबन्ध करना होगा और लोगों को बेहतर शिक्षा, प्रगतिशील साहित्य और अच्छी फ़िल्में उपलब्ध कराना होगा, तभी धीरे-धीरे ही सही, लेकिन क्रांति होगी, लोग समझेंगे और बेहतर समाज का निर्माण करेंगे। इसी तर्क के साथ आने वाली पीढ़ी अंधविश्वास से निकले इसके लिए हम अंधविश्वास का पर्दाफाश लगातार करते रहेंगे।

अंधविश्वास, रूढ़िवाद व तमाम कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करें और बेहतर समाज बनाने के लिए संघर्ष करें।

*✒️ राजेश कुमार सिद्धार्थ अध्यक्ष डॉ आंबेडकर संवैधानिक महासंघ एवं किसान कांग्रेस प्रदेश महासचिव

आने वाली पीढ़ियां क्या अंधविश्वास,पाखंडवाद से निकल पाएंगी?


मेरे दिमाग में बार-बार यही प्रश्न उठता है कि क्या आने वाली पीढ़ी अंधविश्वास और पाखंड से निकल कर वैज्ञानिक चेतना जगा पायेगा? क्या वैज्ञानिक दृष्टिकोण समाज का निर्माण हो पायेगा? ये सवाल का जवाब खोजने का बहुत कोशिश करता हूँ। इस अंधविश्वास की दलदल से लोगों को कौन निकालेंगे? बहुत से महामानव ने जन्म लिए और अंधविश्वास, पाखंड और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आजीवन संघर्ष किये और लोगों को यह समझाते हुए चल बसे की मत पड़ पाखंड में बंधु, लेकिन लोग आज वैज्ञानिक युग में भी यह नहीं समझ पाया कि अंधविश्वास एक अफीम है। यह मन, शरीर के साथ अपने बच्चे और आने वाली पीढ़ी को भी बर्बाद कर देता है।

अंधविश्वास बहुत पुरानी मानसिक बीमारी है, इसीलिए कई बार मुझे लगता है ठीक नहीं हो पायेगा, लेकिन फिर भी मन नहीं मानता और मुझे ऐसा लगता है, देर ही सही, लेकिन लोग समझेंगे और बदलाव जरूर होगा। कब तक सत्य से दूर रह सकेंगे। कब तक झूठ का पर्दाफाश नहीं होगा। वास्तविकता सामने आने पर एक दिन लोगों को झूठ को त्यागकर सत्य में ही वापस आना पड़ेगा। आज भागदौड़ की जिंदगी में युवाओं के पास समय का बहुत अभाव है। एक तरफ घर-परिवार और दूसरी तफर जीवन-यापन के लिए नौकरी-पेशा। लोग दिनभर की हरारत से परेशान होने की वजह से कुछ सोचने की स्थिति में नहीं रहते। किसी को सुनने के लिए फुर्सत नहीं होती, लेकिन आस्था और धर्म के नाम पर कथा सुनने के लिए समय जरूर मिल जाते हैं, नहीं मिला तो नौकरी से छूट्टी लेकर पाखंडी कथावाचक को सुनने पहुँच जाते हैं, क्योंकि लोग काल्पनिक चीजों से डर जाते हैं।

स्वर्ग-नर्क, ये नहीं करोगे तो पाप पड़ेगा या ऐसे करने से सब पाप धूल जाएगा। दूसरा उस पाखंडी की बातों में आकर लालच में पड़ जाते हैं, उसके चरणस्पर्श से ही सब मनोकामना पूर्णा हो जाएगी, ऐसा लगता है जिसकी औलाद नहीं है वे बच्चे पाने के लालच में जाते है और जब औलाद है तो उसकी पढ़ाई को लेकर और पढ़ाई हो गयी तो अच्छी नौकरी के लिए, अच्छे घर में शादी हो ऐसे बहुत सी कामनाएं होती हैं। इसी का फायदा उठाकर पाखंडी बाबा आप लोगों की आँख में धूल झोकर बेवकूफ बना कर निकल लेता है। लाखों, करोड़ों की कमाई कर लेता है और आपको क्या मिलता है? कुछ भी नहीं। सब मेहनत की कमाई को हराम के खाने वाला ले जाता है, बच्चों की दवाई, पढ़ाई के लिए कुछ नहीं बचता और जिंदगी भर किस्मत को कोसते रहते हैं। तमाम अंधविश्वास फैलाने वाली फिल्म, लेख, साहित्य, उद्दीपक पर प्रतिबन्ध करना होगा और लोगों को बेहतर शिक्षा, प्रगतिशील साहित्य और अच्छी फ़िल्में उपलब्ध कराना होगा, तभी धीरे-धीरे ही सही, लेकिन क्रांति होगी, लोग समझेंगे और बेहतर समाज का निर्माण करेंगे। इसी तर्क के साथ आने वाली पीढ़ी अंधविश्वास से निकले इसके लिए हम अंधविश्वास का पर्दाफाश लगातार करते रहेंगे।

अंधविश्वास, रूढ़िवाद व तमाम कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करें और बेहतर समाज बनाने के लिए संघर्ष करें।

*✒️ राजेश कुमार सिद्धार्थ अध्यक्ष डॉ आंबेडकर संवैधानिक महासंघ एवं किसान कांग्रेस प्रदेश महासचिव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *