क्या बुद्ध जन्मोत्सव मनाया जाना चाहिए?

शतकों से चले आ रहे धर्म का दिन मनाना ही है।तब कौन सा दिन मनाया जाना चाहिए।यह महत्त्वपूर्ण प्रश्न है?हिन्दू धर्म अनुसार कभी शिवरात्रि,राम नवमी, कृष्ण जन्माष्टमी का दिन मनाना चाहिए।इन में से कौन सा दिन तय करना है।हिन्दू धर्म की संस्कृति के अलावा कोई दिन शेष नहीं है।और किसी के मस्तिष्क में भी यह प्रश्न नहीं आता है।कि SC,ST,OBC वर्ग के लोगो का अपना भी एक दिन निश्चित किया जा सके।जो हिंदू धर्म अनुसार निश्चित न किया गया हो।
बुद्ध जन्म दिवस मनाया जाय,यह कल्पना भी किसी भी ज्यादातर बहुजनो के मन में भी नहीं आती है।यह आश्चर्य की बात है।ऐसा क्यों है। क्या कारण है।इन प्रश्नों पर विचार किए,बिना समझा नहीं जा सकता है।
बुद्ध संसार में 80 वर्षों तक जीवित रहे।45 वर्षों तक बुद्ध धम्म का प्रचार प्रसार किया।वर्तमान समय में प्रचार प्रसार का जो साधन है।बुद्ध के समय नहीं था।इसके बावजूद मानव और देश कल्याण हेतु पैदल चलकर बुद्ध धम्म का प्रचार प्रसार किया।बुद्ध धम्म 1200 वर्षों तक रहा।भिक्खु का जीवन भिक्षाटन पर था।अनेकों समास्याओं को झेलते हुए भी बुद्ध धम्म भारत से विदेशों तक फैला।परन्तु वर्तमान में सभी प्रकार के प्रचार प्रसार के साधन होते हुए भी बुद्ध धम्म भारत से गायब है।ज्यादातर SC,ST, OBC वर्गो के व्यक्ति नाम तक नहीं लेते हैं।
यह बात बहुत गम्भीर भी है।और चिन्ता करने योग्य भी है।जिस प्रकार कभी कभी झूठ की विजय होती है।और सच्चाई की पराजय होती है।यह ऐसी ही स्थिति है।परन्तु सभी व्यक्ति को यह बात ध्यान में रखें,कभी ना कभी सत्य की विजय होगी ही।वह समय भविष्य में जरूर देखने में आयेगा।1200 वर्षों तक जीवित रहने वाला बुद्ध धम्म पुनः भारत का धम्म बनेगा। ऐसा विश्वास है।सभी SC,ST,OBC वर्गो के व्यक्तियों को बुद्ध धम्म के प्रचार प्रसार में लग जाना चाहिए।
हिन्दू धर्म किसी नदी की तरह है।जिस प्रकार से दो नदियों का संगम बनता है।उस संगम में से एक तीसरी नदी पैदा होती है।हिन्दू धर्म ऐसे ही नदी की तरह बना है।एक नदी का पानी साफ और दूसरी नदी का पानी गंदा हो।तब दोनों नंदियों का संगम होता है। और दोनों नंदियों का पानी मिलता है।तब गंदा पानी साफ पानी को गंदा जरूर करेगा।इसी प्रकार हिन्दू धर्म की नदी और साफ बुद्ध धम्म की नदी में दो तरह का पानी बहकर आया है।साफ बुद्ध धम्म की नदी गंदी हो गयी है।साफ व गंदा पानी अलग-अलग किया जा सकता है।इसी प्रकार से बुद्ध धम्म नदी का पानी भी अलग किया जा सकता है। गंदगी साफ की जा सकती हैं।
SC,ST,OBC वर्गो के व्यक्ति बुद्ध धम्म में धर्मांतरण कर रहे हैं।परन्तु क्या बुद्ध धम्म धर्मांतरण से नियम अनुसार बुद्ध धम्म का आचरण करते हैं।बुद्ध धम्म नियमों का पालन करते हैं।बुद्ध धम्म में धर्मांतरण होना आसान बात नहीं है।बुद्ध धम्म धर्मांतरण के बाद हिन्दू धर्म के विचार और देवता बुद्ध धम्म मे नही ला सकते हैं।डॉ भीमराव अम्बेडकर ने बुद्ध धम्म धर्मांतरण करने से पूर्व 22 प्रतिज्ञाएं इसलिए ही निश्चित किया है।बुद्ध धम्म धर्मांतरण में SC, ST,OBC वर्गो के व्यक्ति घर पर देवता/भगवान की पूजा करें।और घर से बाहर बुद्ध पूजा करें। ऐसा नहीं होना चाहिए।इस प्रकार बुद्ध धम्म नदी का पानी साफ नहीं किया जा सकता है। साथ ही किसी हिन्दू को बुद्ध धम्म धर्मांतरण करना है।तब हिन्दू धर्म की कुरीतीयो का त्याग करना आवश्यक है।जाति वाले हिन्दू लोग बौद्ध बनते हैं।और फिर बुद्ध धम्म को ब्राह्मण धर्म बनानें का कार्य करते हैं।पुनः ऐसे सभी हिन्दू जाति के व्यक्ति बौद्ध बनकर बुद्ध धम्म को नष्ट-भ्रष्ट करने का काम करते हैं।बुद्ध धम्म में बुरे रिति रिवाजों को लेकर बुद्ध धम्म धर्मांतरण नहीं कर सकते हैं।जिन व्यक्तियों को बुद्ध धम्म धर्मांतरण करना है।वह बुद्ध धम्म को जाने बिना धर्मान्तरण न करें।बुद्ध धम्म क्या है।यदि बाद में ठीक लगे तब बुद्ध धम्म धर्मांतरण करें।भानुमती का कुनबा बनाकर चलने वाला नहीं है।
बुद्ध धम्म की जानकारी प्राप्त कर बुद्ध धम्म धर्मांतरण करे।बुद्ध धम्म नियम अनुसार आचरण में प्रयोग करें।बाकी सभी बुरे या अच्छे रीति-रिवाजों को छोड़कर ही बुद्ध धम्म धर्मांतरण करें।वर्तमान में बुद्ध धम्म धर्मांतरण मे शिथिलता है।सभी व्यक्तियों को धम्म की आवश्यकता होती है।इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है।धम्म बिना समाज की स्थापना नहीं हो सकती है।समाज को धम्म की आवश्यकता होती है।जिस धम्म मे समता, स्वतंत्रता,न्याय,बन्धुता,प्रेम हो वह धम्म व्यक्ति को धर्मांतरण करना चाहिए। बुद्ध धम्म में ये सब है।

किसी समय भारत सुसंस्कृत देश था।ऐसा कहा जाता है।परन्तु फिर अचानक भारत मे SC, ST,OBC वर्गो के व्यक्ति कैसे बन गये।जो वर्तमान में कुल जनसंख्या का 85% हिस्सा है।यह प्रश्न सोचनीय है।सभी 85% लोगों का समाजिक,धार्मिक,राजनीतिक,आर्थिक शौषण क्यों और कैसे तथा कौन करता है।सभी का जीवन सुखमय नहीं है।85% बहुजन समाज असमानता,उच्च नीच,चोरी,लूट,आदि करने को मजबूर क्यों है।तत्कालीन और वर्तमान के धर्म गुरुओ या राजाओं या समाज सुधारको ने 85% बहुजन समाज के व्यक्तियो की विषमता को समाप्त करने की कोशिश क्यों नहीं किया है। क्यों तत्काल से वर्तमान तक ऐसे ही रहने दिया गया है।क्या ऐसी संस्कृति को सुसंस्कृत संस्कृति कहा जा सकता है।सुसंस्कृत संस्कृति को मानने वाले लोगों ने क्यों 85% बहुजन समाज को विषमताओं में जीवन व्यतीत करने के लिए छोड़ दिया है।इस प्रकार से स्पष्ट है।कि कहीं न कहीं कोई कमी जरूर है।इस सुसंस्कृत संस्कृति में (SC, ST, OBC) 85% बहुजन समाज विषमता का जीवन ज़ीने को क्यों मजबूर हैं।ऐसा आखिर क्यों है।इस का मतलब है।कि इस सुसंस्कृत संस्कृति में ही कोई कमी है।यही विषमता की वजह भी है।बुद्ध धम्म धर्मांतरण से 85% बहुजन समाज विषमता को समाप्त कर सकता है।बुद्ध धम्म का अध्ययन कर ही बुद्ध धम्म धर्मांतरण करें। यदि वास्तव में जाति मुक्त होना चाहते हैं।तब बुद्ध धम्म आचरण में अपनायें।और मानव कल्याण कर्म करें। बुद्ध धम्म धर्मांतरण ही जाति विहिन समाज की स्थापना करने में सक्षम है। अन्य धर्म मे जाति विहिन समाज की स्थापना नहीं किया जा सकता है।बिना किसी हड़बड़ी और बिना अध्ययन के बुद्ध धम्म धर्मांतरण न करें। बुजुर्ग शायद बुद्ध धम्म धर्मांतरण न करें।परन्तु युवा बुद्ध धम्म धर्मांतरण ज़रूर करें।युवा मानव कल्याण हेतु बुद्ध धम्म धर्मांतरण का मार्ग अपनाकर स्वयं और बहुजन समाज व राष्ट्र का हित करें।

सबका कल्याण हो।👏👏👏👏👏 राजेश कुमार सिद्धार्थ अध्यक्ष डॉक्टर अंबेडकर संवैधानिक महासंघ और किसान कांग्रेस प्रदेश महासचिव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *