नारा दिया है
मोदी है, तो मुमकिन है
क्या-क्या मुमकिन हैं…
देखो जरा आंखे खोलकर !!
●देश के संविधान से छेड़छाड़
●न्यायिक प्रक्रिया से छेड़छाड़
●चुनाव आयोग से छेड़छाड़
●आरबीआई से छेड़छाड़
●सीबीआई से छेड़छाड़
●रक्षा सौदों की फाइलों से छेड़छाड़
●सरकारी सम्पत्तियों से छेड़छाड़
●सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़
●देश की विकास दर से छेड़छाड़
●विकास के आंकडों से छेड़छाड़
●गरीबी के आंकड़ों से छेड़छाड़
●महंगाई के आंकड़ों से छेड़छाड़
●बेरोजगारी के आंकड़ों से छेड़छाड़
●सरकारी नौकरियों से छेड़छाड़
●एससी-एसटी के आरक्षण से छेड़छाड़
●एससी-एसटी की भर्तियों से छेड़छाड़
●एससी-एसटी की जातियों से छेड़छाड़
●एससी-एसटी की नौकरियों से छेड़छाड़
●एससी-एसटी के भर्ती रोस्टर से छेड़छाड़
●एससी-एसटी के पदोन्नति रोस्टर से छेड़छाड़
●एससी-एसटी के कानून से छेड़छाड़
◆एससी-एसटी की छात्रवृत्ति से छेड़छाड़
●एससी-एसटी के मेडिकल में प्रवेश से छेड़छाड़
●एससी-एसटी के इंजीनियरिंग में प्रवेश से छेड़छाड़
●एससी-एसटी की मेरिट से छेड़छाड़
●ओबीसी के आरक्षण से छेड़छाड़
●ओबीसी की भर्तियों से छेड़छाड़
●ओबीसी की मेरिट से छेड़छाड़
●आदिवासियों के अधिकारों से छेड़छाड़
●आदिवासियों की जमीनों से छेड़छाड़
●आदिवासियों के आवासों से छेड़छाड़
●महिलाओं के अधिकारों से छेड़छाड़
●धार्मिक भावनाओं से छेड़छाड़
●साम्प्रदायिक सौहार्द से छेड़छाड़
●सामाजिक सौहार्द से छेड़छाड़
और अंत में
■ सबसे ज्यादा ईवीएम से छेड़छाड़*
बाकी तो आप खुद भी समझदार हैं कि ..मोदी हैं तो छेड़छाड़ तो मुमकिन है ही।
उक्त सभी छेड़छाड़ अभी छोटे स्तर पर 2014-20 के कार्यकाल में हो चुकी हैं, बस अब बड़े स्तर पर हो रही है।
सनद रहे कि आगामी समय में बड़े स्तर की “छेड़छाड़” के लिए जनता खुद जिम्मेदार होगी।
संविधान बचाओं। देश बचाओ।

