यहाँ मैं राजेश कुमार सिद्धार्थ का पत्रकारों के अधिकारों पर विशेष भाषण तैयार कर रहा हूँ। इसमें संविधान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, पत्रकारों की भूमिका और उनके सामने आने वाली चुनौतियों का उल्लेख है।
🗣️ राजेश कुमार सिद्धार्थ ने अपने संबोधन मेंपत्रकारों के अधिकारों पर कहा
“मेरे प्यारे भाइयो-बहनो,
जय भीम! जय संविधान!
आज मैं उस वर्ग की बात करना चाहता हूँ, जिसे समाज का चौथा स्तंभ कहा जाता है – हमारे पत्रकार साथियों की।
साथियो,
भारत का संविधान हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है। यह अधिकार सिर्फ़ आम जनता का नहीं बल्कि पत्रकारों का सबसे बड़ा हथियार है। पत्रकार लोकतंत्र की आवाज़ होते हैं। वे सच को जनता तक पहुँचाते हैं और सत्ता से सवाल पूछते हैं।
लेकिन दुख की बात है कि आज पत्रकारिता खतरे में है। कई पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं, उन्हें धमकाया जाता है, झूठे मुकदमों में फँसाया जाता है, और कई बार उन्हें अपनी जान तक गंवानी पड़ती है।
मैं साफ़ कहना चाहता हूँ –
“अगर पत्रकार सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो लोकतंत्र भी सुरक्षित नहीं रहेगा।”
पत्रकारों को न तो दबाव में आना चाहिए, न ही किसी सत्ता या दलाल पूँजी के गुलाम बनना चाहिए। उन्हें सच बोलने का अधिकार और सुरक्षा मिलनी चाहिए।
राजेश कुमार सिद्बार्थ ने कहा साथियो –
“पत्रकार की कलम – जनता की ताक़त!”
“सच की आवाज़ दबेगी नहीं – झुकेगी नहीं!”
“लोकतंत्र की शान – पत्रकारों का सम्मान!”
मैंने हमेशा अपने आंदोलनों और जनसभाओं में यह कहा है कि – पत्रकारों को पूरी सुरक्षा मिलनी चाहिए। उनके लिए अलग से कानून बने, उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से मज़बूत किया जाए, ताकि वे बिना डर और दबाव के सच को जनता तक पहुँचा सकें।
भाइयो-बहनो,
आज मैं यहाँ यह वादा करता हूँ कि –
“मैं पत्रकारों की आवाज़ हमेशा बुलंद करूँगा। अगर कभी किसी पत्रकार पर हमला होगा, तो राजेश कुमार सिद्धार्थ सबसे आगे खड़ा मिलेगा।”
आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें –
“पत्रकारों की आज़ादी – लोकतंत्र की ज़िम्मेदारी!”
“कलम का सम्मान – भारत की पहचान!”
जय संविधान!
जय भीम!
जय पत्रकार!

