





















संविधान की रक्षा और सामाजिक समरसता के संदेश के साथ निकली ऐतिहासिक संविधान रथ यात्रा
डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ की पहल, 75 रथों के माध्यम से 75 जनपदों तक पहुँचेगा संविधान का संदेश
लखनऊ।
डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ के नेतृत्व में संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक “संविधान रथ यात्रा” का शुभारंभ 28 जनवरी को लखनऊ में उत्तर प्रदेश विधानसभा के सामने से किया गया। इस अवसर पर 75 रथों को हरी झंडी दिखाकर प्रदेश के 75 जनपदों के लिए रवाना किया गया। यह यात्रा न केवल संगठन की वैचारिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम भी बन रही है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने यात्रा की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान समय में संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक समानता के मूल सिद्धांतों को समझना और उन्हें जनमानस में मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ द्वारा यह व्यापक संविधान रथ यात्रा आयोजित की गई है, जो प्रदेश के कोने-कोने तक जाकर आम नागरिकों को उनके संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करेगी।
75 रथ, 75 जनपद और एक संदेश – संविधान सर्वोपरि
28 जनवरी को विधानसभा के सामने आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता और संविधान प्रेमी नागरिक उपस्थित रहे। रथों पर संविधान की प्रस्तावना, डॉ. आंबेडकर के विचार, सामाजिक न्याय, समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व से जुड़े संदेश अंकित थे। रथ यात्रा के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है, जो हर नागरिक को समान अधिकार और सम्मान प्रदान करता है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि यह यात्रा किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के सभी वर्गों को जोड़ने का कार्य करेगी। संविधान रथ यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर गोष्ठियाँ, संवाद कार्यक्रम, नुक्कड़ सभाएँ और जनसंपर्क अभियान चलाए जाएंगे, जिनमें युवाओं, महिलाओं, श्रमिकों, किसानों और वंचित वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
संत शिरोमणि रविदास जयंती पर विशेष कार्यक्रम
संविधान रथ यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव 1 फरवरी को निर्धारित किया गया है। इस दिन यात्रा उत्तर प्रदेश की विधानसभा क्षेत्र संख्या 152, सिधौली में आयोजित संत शिरोमणि रविदास जयंती कार्यक्रम में पहुँचेगी। संत रविदास सामाजिक समरसता, समानता और मानव गरिमा के महान संत थे, जिनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं।
इस अवसर पर संविधान रथ यात्रा का स्वागत किया जाएगा और संत रविदास के विचारों तथा डॉ. आंबेडकर के संविधानात्मक दर्शन के बीच वैचारिक सामंजस्य पर प्रकाश डाला जाएगा। कार्यक्रम में सामाजिक न्याय, छुआछूत के विरोध और समतामूलक समाज की स्थापना जैसे विषयों पर वक्ताओं द्वारा विचार रखे जाएंगे। संगठन के पदाधिकारियों का मानना है कि संत रविदास जयंती जैसे अवसरों पर संविधान के मूल्यों की चर्चा करना समाज को सकारात्मक दिशा में आगे ले जाने का प्रभावी माध्यम है।
2 फरवरी को ग्राम सहजनपुर, अटरिया में पहुँचेगी यात्रा
संविधान रथ यात्रा का अगला चरण 2 फरवरी को अटरिया क्षेत्र के ग्राम सहजनपुर में निर्धारित है। यहाँ ग्रामीण जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ, डॉ. आंबेडकर के जीवन और संघर्ष पर चर्चा तथा ग्रामीणों को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि ग्रामीण भारत संविधान की असली ताकत है। जब तक गाँव-गाँव तक संविधान की समझ नहीं पहुँचेगी, तब तक सामाजिक न्याय का सपना अधूरा रहेगा। सहजनपुर जैसे गाँवों में जाकर संविधान रथ यात्रा यह संदेश देगी कि हर नागरिक, चाहे वह किसी भी क्षेत्र या पृष्ठभूमि से हो, संविधान के तहत समान अधिकार रखता है।
3 फरवरी को ग्राम रामनगर में होगा आयोजन
यात्रा का अगला पड़ाव 3 फरवरी को ग्राम रामनगर में तय किया गया है। यहाँ भी संविधान यात्रा का भव्य स्वागत किया जाएगा। कार्यक्रम में स्थानीय बुद्धिजीवियों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता से संविधान और लोकतंत्र पर खुली चर्चा होगी। युवाओं को विशेष रूप से यह समझाने का प्रयास किया जाएगा कि संविधान केवल परीक्षा की किताबों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि उनके दैनिक जीवन से जुड़ा हुआ एक जीवंत दस्तावेज है।
रामनगर में आयोजित कार्यक्रम में यह भी बताया जाएगा कि किस प्रकार संविधान ने भारत को एक लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। साथ ही, नागरिक कर्तव्यों पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि अधिकारों के साथ-साथ जिम्मेदारियों की समझ भी विकसित हो।
निरंतर जारी रहेगी संविधान रथ यात्रा
डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यह यात्रा केवल कुछ तिथियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि निरंतर जारी रहेगी। 75 रथों के माध्यम से यह अभियान पूरे प्रदेश में अलग-अलग चरणों में संचालित होगा। प्रत्येक जनपद में स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि संविधान रथ यात्रा का उद्देश्य किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब संविधान और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियाँ फैल रही हैं, तब इस प्रकार की यात्राएँ समाज को सही दिशा दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
संगठन की अपील
अंत में डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ ने प्रदेश की जनता से अपील की है कि वे इस संविधान रथ यात्रा में बढ़-चढ़कर भाग लें, कार्यक्रमों में शामिल हों और संविधान के मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करें। संगठन का मानना है कि जब तक हर नागरिक संविधान को समझेगा और उसकी रक्षा के लिए सजग रहेगा, तब तक भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत बनी रहेगी।
संविधान रथ यात्रा न केवल एक कार्यक्रम है, बल्कि यह एक विचारधारा, एक आंदोलन और एक संकल्प है—भारत के संविधान को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प।

