जय संविधान 🇮🇳 जय भारत🎯,जय विज्ञान📲
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“संवैधानिक उद्देश्यों” को पूरा करने के लिए कार्य करना हर एक भारतीय का “धर्म” हैं।
जो भारतीय, अपना धर्म निभाएगा वही सच्चा भारतीय है।
जिस दिन से हम, भारत के लोग भारत का संविधान में दिए गए भारत के नागरिकों के कर्त्तव्य (संवैधानिक कर्तव्यों) को अपना कर्तव्य मानने लगेंगे।
- समानता का अधिकार
यह अधिकार कानून के समक्ष समानता और कानून का समान संरक्षण प्रदान करता है। यह धर्म, जाति, लिंग, या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव को भी रोकता है. - स्वतंत्रता का अधिकार
यह अधिकार भाषण, अभिव्यक्ति, प्रेस, संगठन, सभा, और आंदोलन की स्वतंत्रता प्रदान करता है। यह गिरफ्तारी और निरोध से सुरक्षा भी प्रदान करता है. - शोषण के विरुद्ध अधिकार
यह अधिकार बाल श्रम, मानव व्यापार, और अन्य प्रकार के शोषण के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करता है. - धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
यह अधिकार किसी भी धर्म को मानने, उसका पालन करने, प्रचार करने, और किसी भी धार्मिक संस्था या संगठन में शामिल होने की स्वतंत्रता प्रदान करता है. - सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार
यह अधिकार अल्पसंख्यकों को अपनी संस्कृति, भाषा, या लिपि को बनाए रखने और अपनी पसंद की शिक्षा प्रदान करने का अधिकार प्रदान करता है. - संवैधानिक उपचारों का अधिकार
यह अधिकार नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ न्याय प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करता है। यह सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के मामले में रिट जारी करने की शक्ति प्रदान करता है.
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯 ✒️भाग-4 क, मूल कर्तव्य, अनुच्छेद-51क
और उसको निभाने के लिए कटिबद्ध हो जाएंगे, उन कर्तव्यों को अपनी दिनचर्या में शामिल करने लगेंगे, संवैधानिक मूल्यों को अपने जीवन में शामिल कर लेंगे उस दिन से भारत देश “भारत राष्ट्र” (संविधान का भारत) निर्माण की ओर अग्रसर हो जाएगा।
संविधान का भारत निर्माण हम, भारत के लोगों की सभी समस्याओं का समाधान हैं, हमारे खुशहाल जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आओ मिलकर “संविधान का भारत निर्माण” करते हैं।
*✒ राजेश कुमार सिद्धार्थ अध्यक्ष डॉ आंबेडकर संवैधानिक महासंघ एवं किसान कांग्रेस प्रदेश महासचिव

