मनवां चौकी(सीतापुर) राजेश कुमार सिद्धार्थ ने भावुक अपने संबोधन पत्रकारों और जनता को सम्बोधित करते हुऐ कहा
“मेरे प्यारे भाइयो और बहनो,
जय भीम! जय संविधान!
आज मैं दो ऐसे मुद्दों पर बोलने आया हूँ जो इस लोकतंत्र की जड़ों को हिला रहे हैं। पहला है – पत्रकारों का उत्पीड़न, और दूसरा – जनता की रोज़मर्रा की समस्याएँ।
साथियो,
पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं। वही हमारी आवाज़ को देश-दुनिया तक पहुँचाते हैं। लेकिन आज सच लिखने पर पत्रकारों को जेल में डाला जा रहा है, उन पर झूठे मुकदमे लादे जा रहे हैं, उन्हें धमकाया जा रहा है। कई पत्रकारों ने तो अपनी जान तक गँवा दी। मैं पूछता हूँ – अगर पत्रकार ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो लोकतंत्र की रक्षा कौन करेगा?
राजेश कुमार सिद्बार्थ ने कहा
साथियो –
“सच की कलम पर हमला बंद करो!”
“लोकतंत्र की शान – पत्रकारों का सम्मान!”
भाइयो-बहनो,
दूसरी तरफ़ जनता की हालत देखिए। किसान खेत में खून-पसीना बहाता है, लेकिन फ़सल का दाम नहीं मिलता। मजदूर सुबह से शाम तक मेहनत करता है, फिर भी दो वक्त की रोटी के लिए तरसता है। हमारे नौजवान डिग्री लेकर भटक रहे हैं, लेकिन नौकरी नहीं मिल रही। महँगाई ने गरीब का चूल्हा बुझा दिया है और भ्रष्टाचार ने जनता का सपना लूट लिया है।
यह वही स्थिति है, जिसके खिलाफ बाबा साहब अंबेडकर ने चेताया था – जब तक समाज के आख़िरी व्यक्ति को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक लोकतंत्र अधूरा रहेगा।
साथियो, पत्रकारों की आवाज़ और जनता की पीड़ा दोनों को दबाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन याद रखो – जब-जब जनता उठी है, तब-तब अन्याय की जड़ें हिल गई हैं। इमरजेंसी का दौर हो या किसान आंदोलन, सच की ताक़त ने हर बार सत्ता को झुकाया है।
इसलिए मैं आप सबसे अपील करता हूँ –
“न अन्याय सहेंगे, न अत्याचार – जनता और पत्रकार दोनों का सम्मान!”
“कलम की आज़ादी – लोकतंत्र की ज़िम्मेदारी!”
आओ साथियो, हम सब मिलकर संकल्प लें कि संविधान की रक्षा करेंगे, जनता की समस्याओं का समाधान करेंगे और पत्रकारों की सुरक्षा के लिए लड़ाई को और तेज़ करेंगे।
जय संविधान!
जय भीम!
जय भारत!”

