सिधौली (सीतापुर) राजेश कुमार सिद्धार्थ अध्यक्ष डॉक्टर अंबेडकर संवैधानिक महासंघ एवं किसान कांग्रेस की प्रदेश महासचिव ने बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जयंती पर संबोधित करते हुए कहा


जय भीम जय भारत विश्वरत्न..!!
भारतरत्न..!!💐
बोधिसत्व..!!💐
परमपूज्य..!!💐
महामानव..!!💐
युगपुरूष..!!💐
माहाविद्वान..!!💐
स्त्रीउध्दारक..!!💐
युगप्रवर्तक..!!💐
क्रांतीसूर्य..!!💐
विश्ववंदनीय..!!💐
महान अर्थशास्त्री..!!💐
महान इतिहासकार..!!💐
भारत भाग्य विधाता..!!💐
सिम्बल आफ नाॅलेज..!!💐
भारतीय संविधान के शिल्पकार💐
डाॅ.बाबा साहेब आंबेडकर के जन्मोत्सव पर आप सभी को हार्दिक बधाई एवं अनंत मंगलकामनाए 💐👏🏽💐👏🏽💐💐 डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर (14 अप्रैल, 1891 – 6 दिसंबर, 1956) एक असाधारण व्यक्ति थे जिन्होंने भारत के इतिहास और समाज पर गहरा प्रभाव डाला। वे न केवल एक न्यायविद, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक थे, बल्कि वे दलितों (जिन्हें पहले “अछूत” माना जाता था) के अधिकारों के लिए एक अथक योद्धा भी थे। उनकी जीवनी संघर्ष, दृढ़ संकल्प और सामाजिक न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की कहानी है।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा:
डॉ. आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 को मध्य प्रदेश के महू में एक गरीब दलित परिवार में हुआ था। उनका मूल नाम भीमराव रामजी सकपाल था। वे अपने माता-पिता की चौदहवीं और अंतिम संतान थे। उनके पिता, रामजी मालोजी सकपाल, ब्रिटिश सेना में सूबेदार थे और एक पढ़े-लिखे व्यक्ति थे जिन्होंने अपने बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया।
अपने दलित होने के कारण, भीमराव को बचपन से ही कठोर सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। उन्हें स्कूल में अलग बैठना पड़ता था, पानी पीने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, और कई तरह के अपमान सहने पड़ते थे। इन अनुभवों ने उनके मन पर गहरी छाप छोड़ी और उन्हें सामाजिक असमानता के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित किया।
अपनी तमाम कठिनाइयों के बावजूद, आंबेडकर एक मेधावी छात्र थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कठिनाई से पूरी की। उनके एक ब्राह्मण शिक्षक, कृष्णाजी केशव आंबेडकर, ने उनके प्रति स्नेह दिखाया और उन्हें अपना उपनाम ‘आंबेडकर’ दिया, जो उनके गांव के नाम पर था।
अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए बंबई (अब मुंबई) का रुख किया। बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की। इस सहायता से, आंबेडकर ने एलफिंस्टन कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
उनकी शिक्षा की प्यास यहीं नहीं बुझी। उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और फिर लंदन की यात्रा की। उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एम.ए. और पीएचडी की उपाधियाँ प्राप्त कीं। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उन्होंने डी.एससी. की उपाधि प्राप्त की और बैरिस्टर-एट-लॉ की डिग्री भी हासिल की। उनके पास कुल 32 डिग्रियाँ थीं, जो उनकी विद्वता और ज्ञान के प्रति समर्पण को दर्शाती हैं। उन्होंने विभिन्न विषयों का गहन अध्ययन किया था, जिनमें अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, कानून, समाजशास्त्र और दर्शनशास्त्र शामिल हैं।
करियर और सामाजिक-राजनीतिक संघर्ष:
भारत लौटने के बाद, डॉ. आंबेडकर ने महसूस किया कि शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद दलितों की सामाजिक स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया था। उन्होंने अपना जीवन दलितों और अन्य वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने में समर्पित कर दिया।
उन्होंने कई संगठन स्थापित किए, जिनमें बहिष्कृत हितकारिणी सभा (1924) और अखिल भारतीय दलित वर्ग संघ (1930) प्रमुख हैं। इन संगठनों के माध्यम से उन्होंने दलितों को संगठित किया, उन्हें शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया और उनके नागरिक अधिकारों के लिए आवाज उठाई।
डॉ. आंबेडकर ने सार्वजनिक आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया ताकि दलितों को मंदिरों में प्रवेश करने, सार्वजनिक कुओं से पानी लेने और अन्य सामाजिक भेदभावों को समाप्त करने का अधिकार मिल सके। उनका मानना था कि राजनीतिक शक्ति के बिना सामाजिक समानता प्राप्त नहीं की जा सकती है।
उन्होंने 1936 में इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी की स्थापना की, जिसने श्रमिकों और दलितों के हितों का प्रतिनिधित्व किया। बाद में, यह पार्टी अखिल भारतीय अनुसूचित जाति महासंघ में बदल गई।
संविधान निर्माण में भूमिका:
भारत की स्वतंत्रता के बाद, डॉ. आंबेडकर को संविधान सभा के सदस्य के रूप में चुना गया। उन्हें संविधान मसौदा समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, और उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारतीय संविधान में सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों को शामिल करने में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने अस्पृश्यता को गैरकानूनी घोषित करवाने, सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार दिलाने और कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना था कि संविधान एक ऐसा दस्तावेज होना चाहिए जो सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करे और सामाजिक भेदभाव को समाप्त करे।
कानून मंत्री और हिंदू कोड बिल:
स्वतंत्र भारत के पहले मंत्रिमंडल में डॉ. आंबेडकर को कानून मंत्री नियुक्त किया गया। इस पद पर रहते हुए, उन्होंने हिंदू कोड बिल को पारित कराने के लिए अथक प्रयास किया। इस बिल का उद्देश्य हिंदू कानूनों में सुधार करना और महिलाओं को संपत्ति, विवाह और तलाक के मामलों में समान अधिकार प्रदान करना था। हालांकि, इस बिल के कुछ प्रावधानों पर विरोध के कारण इसे कई हिस्सों में पारित किया जा सका।
बौद्ध धर्म में परिवर्तन और निधन:
अपने जीवन के अंतिम वर्षों में, डॉ. आंबेडकर बौद्ध धर्म की ओर आकर्षित हुए। उनका मानना था कि हिंदू धर्म में व्याप्त जाति व्यवस्था दलितों के लिए मुक्ति का मार्ग नहीं प्रशस्त करती है। 14 अक्टूबर, 1956 को नागपुर में उन्होंने लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया।
6 दिसंबर, 1956 को दिल्ली में उनका निधन हो गया। उन्हें मरणोपरांत 1990 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
विरासत:
डॉ. भीमराव आंबेडकर एक महान समाज सुधारक, शिक्षाविद, न्यायविद और मानवतावादी थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन सामाजिक न्याय और समानता के लिए समर्पित कर दिया। भारतीय संविधान में उनके योगदान के लिए उन्हें “भारतीय संविधान का जनक” कहा जाता है।
उनकी विचारधारा और कार्य आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करते हैं। वे दलितों और अन्य वंचित समुदायों के लिए एक प्रतीक हैं, जिन्होंने सामाजिक भेदभाव के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उनकी जयंती (14 अप्रैल) भारत में ही नहीं, बल्कि विश्व के कई देशों में सामाजिक न्याय और समानता के दिवस के रूप में मनाई जाती है। उनका जीवन और संघर्ष हमें सिखाता है कि दृढ़ संकल्प और शिक्षा के माध्यम से किसी भी प्रकार के सामाजिक अन्याय के खिलाफ लड़ा जा सकता है। 💐💐💐👏🏽
अपने महापुरुषों को मानने से बेहतर, उनको और उनके विचारों को जानना जरुरी है ! इसी से व्यवस्था परिवर्तन संभव है !
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने बाबासाहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जयंती पर संबोधित करते हुए बाबा साहेब की त्याग और संघर्ष के विषय में व्यापक जानकारी दी इस अवसर पर महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष सोनम गौतम पंडित प्रदीप पासी अभय प्रताप त्यागी अनुज कुमार गौतम प्रमोद कुमार गौतम रामनरेश गौतम राजू गौतम सर्वेश गौतम विनीत कुमार गौतम सुमित कुमार गौतम अमर सिंह चौधरी आदि लोगों ने विचार व्यक्त किया

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